मिसाइल परीक्षण के बाद ग्राउंड जीरो पर कैसे हैं हालात अगर उत्तर कोरिया से युद्ध हुआ तो क्या होगा?

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मिसाइल परीक्षण के बाद ग्राउंड जीरो पर कैसे हैं हालात अगर उत्तर कोरिया से युद्ध हुआ तो क्या होगा?

कोरिया बॉर्डर (जयप्रकाश रंजन)। उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण के बाद जहां पूरी दुनिया में तनाव का माहौल है वहीं दैनिक जागरण हालात का जायजा लेने ग्राउंड जीरो दक्षिण को‍रिया बॉर्डर पर पहुंचा है। ग्राउंड जीरो के हालात से आपको वाकिफ कराती ये है विस्तृत रिपोर्ट।

उत्तर कोरिया की तरफ से बुधवार को सुबह के एक बजे किये गये मिसाइल परीक्षण से अमेरिका से लेकर टोक्यो तक फिर से सनसनी फैल गई है लेकिन इसके पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में सब कुछ सामान्य है। सरकार अभी भी इस क्षेत्र में फैली अस्थिरता को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की बात कर रही है। जबकि सड़कों पर लोगों के बीच इस तनाव को लेकर कोई बेचैनी नहीं है। यहां की आम जनता यह मान रही है कि उत्तर कोरिया का सनकी तानाशाह किम जोंग जो भी कर रहा है वह दुनिया के दूसरे देशों को संदेश देने के लिए ज्यादा कर रहा है।

दूसरी तरफ यहां की सरकार यह भी मान रही है कि जैसे जैसे विंटर ओलंपिक के दिन नजदीक आते जा रहे हैं वैसे वैसे उत्तर कोरिया की तरफ से उकसाने की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। दक्षिण कोरिया के एक शहर प्योंगचांग में विंटर और पैरा ओलंपिक अगले वर्ष 2018 मे होने वाली है।

यहां के अधिकारी मानते हैं कि वर्ष 1988 के सियोल ओलंपिक से पहले वर्ष 1987 में उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के एक यात्री जहाज को बम से उड़ा दिया था उस तरह की कोशिश इस बार भी की जा सकती है। तब उस घटना में 115 यात्रियों की मौत हुई थी उसमें 113 दक्षिण कोरियाई थे जबकि दो भारतीय थे।

उत्तर कोरिया नहीं चाहता है कि दक्षिण कोरिया फिर से सफलतापूर्वक किसी अंतरराष्ट्रीय खेल का आयोजन करे ताकि वैश्विक स्तर पर उसकी साख में इजाफा हो। यही वजह है कि जब पिछले कुछ महीनों से सब कुछ शांत चल रहा था तब किम जोंग-उन ने अमेरिका तक मार करने की क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है।

दक्षिण कोरिया के रक्षा नीति के उप मंत्री यो सूक जू ने भारत से यहां आये पत्रकारों के दल को बुधवार को बताया कि उत्तर कोरिया की तरफ से किया गया कोई भी उकसावा विंटर ओलंपिक या पाराओलंपिक को नहीं रोक सकता है। जहां तक आज सुबह किये गये मिसाइल परीक्षण का सवाल है तो जू का कहना है कि हम उकसावे में नहीं आते हैं। अगर उत्तर कोरिया अपनी शक्ति दिखाना चाहता है तो उसे यह भी मालूम होना चाहिए कि दक्षिण कोरिया के पास अमेरिका के आण्विक हथियारों का संरक्षण प्राप्त है।

हम किसी भी तरह की कार्रवाई का जबाव देने में सक्षम है। हालांकि इसके साथ जू यह भी मानते हैं कि हालात अभी भी शांतिपूर्ण वार्ता से काबू में आ सकता है। वह कहते हैं कि सबसे ज्यादा दबाव मीडिया की तरफ से है। हमारे देश में बहुत से लोग हैं जो यह मानते हैं कि उत्तर कोरिया के मुकाबले हमें भी आण्विक बम बनाना चाहिए लेकिन हमारी सरकार आण्विक हथियारों के सख्त खिलाफ है। हां, हमारे पास अमेरिका जैसा एक मजबूत सहयोगी देश जरूर है।

यह संयोग ही है कि भारतीय मीडिया दल को दक्षिण कोरिया के रक्षा नीति के उप विदेश मंत्री से बात करने का मौका उत्तर कोरिया की तरफ से मिसाइल परीक्षण करने के कुछ ही घंटे बाद मिला है। जू मानते हैं कि उत्तर कोरिया की तरफ से जो उकसावे वाले कदम उठाये जा रहे हैं उससे हालात और बिगड़ेंगे। यही वजह है कि हम चाहते हैं कि दुनिया के तमाम देशों को उत्तर कोरिया पर और ज्यादा कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए कदम उठाये जाने चाहिए। ताकि वह बातचीत के लिए तैयार हो सके।

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